रजिस्ट्री सं० डी० एल०-33004/99
REGD. NO. D. L.-33004/99
भारत का राजपत्र
The Gazette of India
असाधारण
EXTRAORDINARY
भाग III—खण्ड 4
PART III—Section 4
प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 281]
नई दिल्ली, मंगलवार, जुलाई 30, 2019/श्रावण 8, 1941
No. 281]
NEW DELHI, TUESDAY, JULY 30, 2019/SHRAVANA 8, 1941
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
अधिसूचना
हैदराबाद, 26 जुलाई, 2019
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (विनियामक सैडबाक्स) विनियम, 2019
फा.सं. भा.बी.वि.प्रा./विनियम/11/162/2019.—बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 14(2)(छ) और 26 के साथ पठित बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 114ए की उप-धारा 2 के खंड (जेडीसी) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्राधिकरण बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, इसके द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात् :-
अध्याय I
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ:
- (1) ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (विनियामक सैडबाक्स) विनियम, 2019 कहलाएँगे।
- (2) ये विनियम सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
- (3) ये विनियम सरकारी राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 2 वर्ष की अवधि के लिए प्रचलन में होंगे।
2. उद्देश्य: इन विनियमों के उद्देश्य निम्नलिखित हैं :
- (1) एक ओर बीमा क्षेत्र के सुव्यवस्थित विकास एवं दूसरी ओर पॉलिसीधारकों के हितों के संरक्षण के बीच संतुलन उत्पन्न करना, जबकि इसके साथ ही नवोन्मेषण को सुसाध्य बनाना;
- (2) विनियामक सैडबाक्स परिवेश के निर्माण को सुसाध्य बनाना तथा प्राधिकरण द्वारा बनाये गये किन्हीं ऐसे वर्तमान विनियमों के उपबंधों को एक सीमित दायरे और सीमित अवधि के लिए शिथिल करना, यदि ऐसे शिथिलन की आवश्यकता हो।
3. परिभाषाएँ:
- (1) इन विनियमों में जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो:-
- क. “अधिनियम” से बीमा अधिनियम, 1938 अभिप्रेत है;
- ख. “आवेदक” में निम्नलिखित शामिल हैं
- i. बीमाकर्ता अथवा
- ii. मध्यवर्ती अथवा बीमा मध्यवर्ती अथवा
- iii. वैयक्तिक को छोड़कर पिछले वित्तीय वर्ष के लिए न्यूनतम दस लाख रुपये की निवल मालियत रखनेवाला कोई व्यक्ति
- iv. प्राधिकरण द्वारा मान्यताप्राप्त कोई अन्य व्यक्ति
जो भारत में बीमा में नवोन्मेषण को बढ़ावा देने के लिए अकेले अथवा संयुक्त रूप से अनुमति की अपेक्षा करता हो;
- ग. “प्राधिकरण” से बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 3 की उप-धारा (1) के अधीन स्थापित भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अभिप्रेत है;
- घ. “विनियम” से अधिनियम की धारा 2 (16ए) के अंतर्गत परिभाषित रूप में प्राधिकरण द्वारा बनाये गये विनियम अभिप्रेत है;
- ङ. “विनियामक सैडबाक्स” से वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में प्रयुक्त परिवेश अभिप्रेत है, जो ऐसे नये व्यावसायिक मापदंडों, प्रक्रियाओं और अनुप्रयोगों के लिए परीक्षण का आधार उपलब्ध कराता है, जो आवश्यक रूप से वर्तमान विनियमों द्वारा पूर्णतः सम्मिलित नहीं किये गये हों अथवा जो उनका पूर्णतः अनुपालनकर्ता न हों;
- च. “सैडबाक्स परिवेश” से एक विशिष्ट समयावधि के लिए प्रयोग हेतु अभिकल्पित परीक्षण परिवेश अभिप्रेत है।
- (2) इन विनियमों में प्रयुक्त और अपरिभाषित, परंतु बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) अथवा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) अथवा उनके अधीन बनाये गये नियमों या विनियमों में परिभाषित शब्दों और अभिव्यक्तियों के अर्थ वही होंगे जो क्रमशः उन अधिनियमों अथवा नियमों या विनियमों, जैसी स्थिति हो, में उनके लिए निर्धारित किये गये हैं।
अध्याय II
भारत में बीमा में नवोन्मेषण को बढ़ावा देने के लिए अनुमति की अपेक्षा करने हेतु प्रक्रिया
4. आवेदन की श्रेणियाँ:
- (1) आवेदक भारत में बीमा में नवोन्मेषण को बढ़ावा देने अथवा कार्यान्वित करने के लिए अनुमति करते हुए निम्नलिखित किसी एक अथवा अधिक श्रेणियों में आवेदन कर सकता है:
- (क) बीमा की अपेक्षा (सलिसिटेशन) अथवा वितरण
- (ख) बीमा उत्पाद
- (ग) जोखिम-अंकन
- (घ) पालिसी और दावों की सर्विसिंग
- (ङ) प्राधिकरण द्वारा मान्यताप्राप्त कोई अन्य श्रेणी।
5. भारत में बीमा में नवोन्मेषण को बढ़ावा देने के लिए अनुमति प्रदान करने हेतु आवेदन:
- (1) भारत में बीमा में नवोन्मेषण को बढ़ावा देने अथवा कार्यान्वित करने का इच्छुक आवेदक विनिर्दिष्ट फार्म में इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्राधिकरण को आवेदन प्रस्तुत करेगा।
- (2) आवेदन के साथ वापस न करने योग्य दस हजार रुपये का प्रसंस्करण शुल्क भेजा जाएगा।
- (3) प्राधिकरण विनियामक सैडबाक्स दृष्टिकोण के अंतर्गत बीमा क्षेत्र में नवोन्मेषण को बढ़ावा देने के लिए आवेदन आमंत्रित करने में एक सहगण (कोहार्ट) दृष्टिकोण का अनुसरण करेगा।