e-Gazette statutory gazette instrument · 15 Oct 2026
7898 GI/2026 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY पत्तन, पोत पररवहन और िलमागग मंत्रालय अजधसूचना नई दिल्ली, 14 अक्टूबर, 2026 सा. का. जन. 885(अ). –…
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Open source pageरजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
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The Gazette of India
सी.जी.-डी.एल.-अ.-15102026-277176 CG-DL-E-15102026-277176
असाधारण EXTRAORDINARY
भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i)
प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 814] नई दिल्ली, बुधवार, अक्तूबर 14, 2026/आश्विन 22, 1948 No. 814] NEW DELHI, WEDNESDAY, OCTOBER 14, 2026/ASVINA 22, 1948
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
अधिसूचना
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर, 2026
सा. का. नि. 885(अ). – केन्द्रीय सरकार वाणिज्य जलयान परिवहन अधिनियम, 2025 (2025 का 24) की धारा 130 की उप-धारा (1) और उप धारा (2) के खंड (क), (ख) और (ज), और धारा 174 की उप धारा (1) और उप धारा (2) के खंड (क), द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, तथा वाणिज्य जलयान परिवहन (समुद्र में टकराव की रोकथाम) विनियम, 1975 को उन बातों के सिवाय अधिक्रांत करते हुए, जिन्हें ऐसे अधिक्रमण से पहले किया गया है या करने का लोप किया गया है, निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्:-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम वाणिज्य जलयान परिवहन (समुद्र में टकराव की रोकथाम) नियम, 2026 है।
2. लागू होना: ये नियम निम्न पर लागू होंगे-
3. परिभाषाएँ। - (1) इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) "अधिनियम" का अर्थ वाणिज्य जलयान परिवहन अधिनियम, 2025 (2025 का 24) है;
(ख) "प्रशासन" से समुद्रीय प्रशासन महानिदेशक अभिप्रेत है;
(ग) "अभिसमय" से समुद्र में टकराव को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय विनियमों पर अभिसमय, 1972 अभिप्रेत है, जैसा कि संशोधित किया गया है; और
(घ) "अनुसूची" से इन नियमों के साथ संलग्न अनुसूची अभिप्रेत है।
(2) इन नियमों में प्रयुक्त वे शब्द और अभिव्यक्तियां जो परिभाषित नहीं हैं, किंतु अधिनियम या अभिसमय में परिभाषित है, उनका वही अर्थ होगा जो अधिनियम या अभिसमय में क्रमशः दिया गया है।
4. यातायात पृथक्करण स्कीम - अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन द्वारा अपनाई गई यातायात पृथक्करण स्कीम, और प्रशासन द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाने वाले अन्य मार्ग उपाय, उन सभी जलयानों पर बाध्यकारी होंगे जिन पर ये नियम लागू होते हैं।
5. टकराव या दुर्घटना के बाद दायित्व - (1) टकराव के प्रत्येक मामले में, मास्टर, अधिनियम की धारा 159 के अनुसरण में, -
(क) टकराव विवरण और जिन परिस्थितियों में यह घटित हुई, उसका विवरण तुरंत अधिकारिक लॉगबुक (यदि कोई हो), या अन्य रिकार्ड जो जलयान पर रखा गया हो, में दर्ज किया जाना चाहिए; और
(ख) सुनिश्चित करें कि प्रविष्टि पर मास्टर और साथ ही ड्यूटी पर मौजूद अधिकारी या नाविकों में से एक के हस्ताक्षर हैं।
(2) जहाँ इन नियमों के लागू होने वाले किसी जलयान के साथ ऐसी कोई दुर्घटना हुई हो अथवा उसके कारण ऐसी कोई दुर्घटना हुई हो, जिससे किसी व्यक्ति की मृत्यु या उसे कोई गंभीर चोट लगी हो, अथवा जलयान को ऐसा कोई महत्वपूर्ण नुकसान हुआ हो, जिससे उसकी समुद्र-योग्यता या उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हुई हो, चाहे वह उसके ढाँचे में हुआ हो अथवा उसकी मशीनरी के किसी भाग में ऐसा परिवर्तन किया गया हो कि वह अधिनियम के अंतर्गत जलयान के संबंध में जारी किए गए किसी भी प्रमाण पत्र में की गई जानकारी से मेल न खाता हो, तो मास्टर या स्वामी, अधिनियम की धारा-160 के अनुसरण में दुर्घटना घटित होने और नुकसान होने के बाद यथाशीघ्र तथा किसी भी स्थिति में चौबीस घंटे से अधिक विलंब किए बिना, प्रशासन या निकटतम प्रधान अधिकारी को दुर्घटना या नुकसान तथा उसके संभावित कारणों की रिपोर्ट भेजेगा। उक्त रिपोर्ट में जलयान का नाम, उसका आधिकारिक क्रमांक, उसका पंजीकरण पत्तन तथा उस स्थान का उल्लेख किया जाएगा जहाँ जलयान स्थित है।